Friday, 22 February 2013

थम सा गया है वक़्त कुछ इस तरह से मेरे लिए

थम सा गया है वक़्त कुछ इस तरह से मेरे लिए

मैं जब सो कर  उठती हूँ तो वक़्त
पाँव के पास मेरे उन्घ्ता दिखाई देता है 

मै दबे पाँव उसके लिए चाय बना लाती हूँ
वक़्त को थाम कर अपने साथ चाय पिलाती हूँ

एक वक़्त है जो साथ मेरे चलता है 
मैं जो रुक जाऊं तो दूर खड़ा रुकता है 

मेरे पैरों पर एक अनदेखी जंजीर है
जो चुभती है , तकलीफ देती है 

वक़्त भी अपनी जंजीरों की गिला करता है 
कैसे दिन रात ! मौसमों में बंधा रहता है 

इतनी ख़ामोशी है की वक़्त की टिक-टिक भी नहीं सुनाई देती
और उसे मेरी दर्द में डूबी हुई तन्हाई भी नहीं दिखती


जाने क्यूँ वक़्त भी नहीं जाता मुझे छोड़ कर
थम सा गया है वक़्त कुछ इस तरह से मेरे लिए

Thursday, 21 February 2013

लहू का रंग लिए।।।।।।।। 

मुदतें हुई कागज़ को तह लगाए
किसी के आंसू थे लहू का रंग लिए।।।।।।।। 

मैं खुद में  मैं हूँ ,और खुदा  मेरा

तुम्हे बताऊँ मैं किस्सा दिल का
नहीं समझते हो तुम ये सौदा दिल का

फ़कत  लैला- मजनू को पढने वालों
मेरा दिल घरोंदा है दर्दे जहाँ का

न कोई मजनू है न फरहाद मेरा
मैं खुद में  मैं हूँ ,और खुदा  मेरा








Tuesday, 19 February 2013

दिन के उगने और सोने के बीच
हर  लम्हा कई साल जिया करता है  
बादलों ने घेरे हैं कुछ लोग आसमान में
टूट के बरस जाते तुम तो अच्छा  होता

रात

"रात" उठ के तकिये से सुबह के पास चली
दिल का दर्द भी सुरमई बना तुमको ढूंढता है.    

मैं तुम्हे भूल जाऊं या न भूला सकूँ कैसे कहूँ 
ये जिद्दी दिल है!देखे इसकी क्या मेहरबानी है।।

Monday, 18 February 2013

यह कहानी


चलो सुनाए जमाने को अपनी यह कहानी 
हम तुम मिल न सके तब भी यह कैसी यादें पुरानी 
मैं तुमसे दूर हूँ यह तो मालूम है
पास तुम भी मेरी यादों के रहा न करो