Friday, 5 April 2013

 अक्सर

रोज एक नयी सुबह को "कल" में बदलती हूँ
"नयी बातों" को  पुरानी करती रहती  हूँ मैं अक्सर

टूटी चूड़ियों,में भी कैसे समां जातीं हैं यादें
उन यादों को धीरे से बिटोरती  हूँ  अक्सर

समुन्द्र की तेज लहरों सा मचल जाता है जीवन
हल्के से साँसों को धुप दिखाती हूँ अक्सर

साल का सिर्फ एक दिन  मुययन  किया है तुमने
तुमसे  मिलने की ख्वाइश में साल निकल जाता है अक्सर







not bad banna......

मदहोश मुसाफिर, हूँ, फिर भी
होश में "दिन-रात" मुझे उठाते हैं

पीतीं हूँ जहर-ए -शराब फिर भी
लोगों की जेहरिली आँखों से डरती हूँ

मुझको मालूम है तुम्हारी याद मेरी दुश्मन है
फिर भी रोज उसको प्यार से पहलु में सुलाती हूँ

कैसी दुश्मन है शराब, फिर भी ए  दोस्त
तेरी याद, तुझसे दूर,पर  मेरे पास लाती है

मै  कल  उठू, और सोंचू की ये क्या लिखा
दिल, दर्द, दिमाग और शराब साथ गाती है





so end of may.. paris disneyland

end of june scotland

end of sept. india

end of dec. lapland

end of feb. cayman island....................... not bad banna.