Saturday, 10 August 2013

echo

ए बाजी ईईइ  …. 
बुई ले ऐयेह ,
बाजा ले ऐएय , 
खिलौना ले ऐयेह ......

Sunday, 4 August 2013

तुम्हारे लिए


तुम्हारे लिए

पलकों पर फड़-फड़ करती
आई थी मैं तुम्हारे लिए
सपनो में उडती हूँ रात भर
थकती नहीं , रूकती नहीं
बस तुमको देख कर
थम सी जाती हूँ
तुम्हारी पलकों तले
बन के आंसू कभी पिघल जाती हूँ
कभी होठों के आखरी कोने
की हंसी बन ठहर  जाती हूँ
भीड़ की  तन्हाई का पल
वो पल , बस एक पल बन कर
जेहन से आँखों की
फिर आँखों से दिल की
दूरी में सिमट जाती हूँ
मैं तुम्हारा ख्वाब हूँ
एहसासों  की मीठी बैचैनी
लिए साथ तुम्हारे रहती हूँ.................... (वन्दना )






मुस्कराने ,की कुछ ऐसी लत लगी
आँसू  भी मेरे हंस कर गिरते हैं