Saturday, 17 August 2013

अब छोड़ दिया है,यादों में आना- जाना
जिंदगी बोल , अब जियेगी कैसे ?????

Monday, 12 August 2013

क्यूंकी मेरा नाम मोहब्बत है

और तुम जो पूछ  पाते मुझसे, की अब जाना कहाँ है ?
की अब रास्ता  कहाँ है ? और अगर मैं कह पाती
की तुम्हारा और मेरा रास्ता
दूर बहुत दूर, कहीं  एहसासों में पड़ा है
जहाँ हम कभी नहीं मिल पाते, पर फिर भी रोज मिलते हैं

और मैं अगर पूछ पाती की हम पहले कब मिले थे ?
तो तुम जरुर बोल देते अरे कल ही तो। … शायद पिछले जन्मों  में.
मैं फिर से  यादों में खो जाती,शायद पिछले जन्म तक जा पाती
नए सपनों  में सजा ,तुमसे रोज मिल पाती
तुमसे रोज नए वादे करती और रोज नए वादे तोडती

और मैं अगर  वक़्त को रोक पाती और पूछ  पाती उससे  की वो
दिन और रात का गुलाम क्यूँ  बना बैठा है?
सोचो कितना अच्छा  होता
अगर , दिल ढलते  ही  वक़्त सो जाता
और सूरज के साथ वक़्त भी निकलता
मैं रोज वक़्त को नए गीत सुनाती

और लोग…. उफ़ ये टेड़े -मेढे  लोग
हर एक पंक्ति में तुम्हे खोजने जाते है
जाने कितना वक़्त गवातें   हैं
तुम जो मेरी भावनाओ में कैद हो
यहाँ पन्नों पर कितना  खुश दिखते हो
हर नए शब्द में साँस  लेते  हो
हर  एक पंक्ति पर झूम उठते हो

और मैं "हम-तुम" को जन्म देती रहती हूँ
कभी भूलने नहीं देती, कभी मरने नहीं देती
क्यूंकी  मेरा नाम मोहब्बत है
क्यूंकी  मेरा नाम इबादत है