Thursday, 12 September 2013

randomites kuch yunhi

 


मेरी मासूम  ख्वाइशें पढ़ती रहती है
तुम्हारी अनकही बातें,तुम्हारी बोलती खामोशी। ……

मिलेगी कभी  मंजिल, भी तो पूछेगी
किस तरह राह बदल बदल कर मैं पहुँची  तुझ तक।

मेरी यादों में ही जीते रहे तुम रोजाना
 मरने को तो ख्वाब मेरे रोजाना मरते हैं

डायरी   के पन्नों में खोजो खुद को
हर पन्ने की मोड़ पर तुमको छुपा रखा है

गहरी साँस है जो तुमको पढ़ती है ,चुप रहती है
दिल भी ख़ामोशी से सर झुकाए रहता है







 
गहरी साँस है जो तुमको पढ़ती है ,चुप रहती है
दिल भी ख़ामोशी से सर झुकाए रहता है
डायरी   के पन्नों में खोजो खुद को
हर पन्ने की मोड़ पर तुमको छुपा रखा है 
मेरी यादों में ही जीते रहे तुम रोजाना
 मरने को तो ख्वाब मेरे रोजाना मरते हैं

Wednesday, 11 September 2013

तुझ तक।

मिलेगी कभी  "मंजिल" भी तो पूछेगी
किस तरह राह बदल बदल कर मैं पहुँची  तुझ तक। 

Monday, 9 September 2013

खामोशी।

मेरी मासूम  ख्वाइशें पढ़ती रहती है
तुम्हारी अनकही बातें,तुम्हारी बोलती खामोशी। …… 

प्रक्रति का नियम हूँ शायद

सुर्ख गुलाब की पंखुड़ी पर
ओस की बूँद सी पड़ी हूँ मैं 
बस कुछ देर का भ्रम हूँ शायद
सूरज की गर्मी में उड़ जाऊं शायद
या भी नन्ही चिड़िया कोई पी जाए शायद
गिर के धूल में मिल जाऊं शायद
या फिर तितली के अंग से लिपट जाऊं शायद
मेरा, मैं और मुझसा कुछ भी नहीं
प्रक्रति का नियम हूँ शायद