Friday, 4 October 2013

तुमसे ही

कोई पागल सी नजर मुझको छुके जाए तो
भरी महफ़िल में अचानक तेरी याद आए तो
सामने वाले से बात मैं  कुछ भी करूँ
जहन के पिछले हिस्से में तू बस जाए तो    

randomites just yuhin

वो बीते हुए हसीं पल जो दिल में बसें हैं
जैसे मेरे जीने के लिए थोडा वक़्त निकालतें हैं

अपने लिए भी अब समय से बात कर सकूँ
इस कदर रोज समय को बिताना पड़ता है

दिल का  सुनना आज-कल तकलीफ देता है
दिल का क्या है , इसे तो  आदत है रोने की

खुद के लिए "समय" से दोस्ती की थी
"समय" ने भी तुझ तक जाने की जिद की है

मेरी कल्पना के मुसाफिर मुझे इतना तो बता
"वक़्त" का तुझसे और मुझसे रिश्ता क्या है ??


 

समय

खुद से मिल सकूँ इसलिय 'समय' से दोस्ती की थी
अब 'समय' ने भी तुझ तक जाने की जिद की है

Thursday, 3 October 2013

रिश्ता

मेरी कल्पना के मुसाफिर मुझे इतना तो बता
'वक़्त' का तुझसे और मुझसे रिश्ता क्या है ???