Saturday, 2 November 2013

तेरे माथे पर टंगी तीन लकीरें
मुझसे पूछती है, कि मैं कौन हूँ तेरी??????

 

Tuesday, 29 October 2013

तेरी आवाज मुझ तक आती है
दर्द के साज भी गुनगुनाती है
तू आजाद कर दे मुझे अपनी यादों से
मेरी रूह भी अब छलनी  हुई जाती है.



 

Monday, 28 October 2013

चाँद से खफा खफा सी चाँदनी
 रात आँगन में मेरे रहने आयी  है
 
याद बन बन कर गिरे मेरे आँसू
चाँद से रूठ कर चांदनी भी आयी है




 
मेरी  ही धुप में सुलगता मेरा साया
तुम्हारी छाँव को तलाशता है