Saturday, 30 November 2013

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना
नये मुसाफिर को राहें गुमराह करती हैं
हर एक ठौर को ,पगला मंजिल समझता है
हर नयी उम्मीद पर दिन बदलता है
हर नये ख्वाब को दिल, सच समझता है
एक तू है की साथ मेरे जलता है
और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना...


और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना
कितनी मजबूर है मोहबत  यह  तू देख जरा
आह भर्ती है मोहबत  पर कहती नहीं
कितने अफसाने देखे है तूने ख़त्म होते
कितने परवाने देखे है शमा पर  फन्ना होते
कितनी आँख से आंसू बहे मोम बनके
एक तू है की साथ मेरे जलता है
एक तू है की साथ मेरे पिघलता है

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना
हर आस ,हर उम्मीद धुआं धुआं सा है
दिल-ए-अरमान भी बुझा बुझा सा है
एक तेरी लौ जो टिमटिमाती  है
कभी बुझती है कभी खुद से जल जाती है
एक सुरंग से आती रौशनी की तरह
 तू  ही है की साथ मेरे जलता है
और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना

और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना 
रास्ते में हैं अंधेरे  नसीबों की तरह 
हर एक मुस्कान के पीछे  रुसवाई  है  
हर शख्स से दूर उसकी परछाई हैं 
एक तू है की साथ मेरे जलता है 
 और कुछ देर चिरागों अभी जलते रहना 
 





 

Tuesday, 26 November 2013

तकदीर

हाँथों कि चंद लकीरें जब मिलती है
मेरी हथेली से तेरी हथेली तक
कभी देखा है कैसे उठ कर हम -तुम
समय की तकदीर बाँटते  हैं

Monday, 25 November 2013

सच और झूठ

आँखों में  डूबता हुआ झूठ
पलक झपकाता   नहीं,
कि बह  न जाए कहीं
सच की आगोश में।