Thursday, 25 December 2014

तुम्हारे ख्यालों के पदचिन्ह आज 
 आँखों से आँसू बन ढलकते हैं। .... 

Wednesday, 19 November 2014

आँसू

आँसू

माना की आपकी आँख से टपक चुका हूँ
आँसू था मैं ,पलक  से लिपटना फ़िज़ूल था


Thursday, 13 November 2014

दिया है खंज़र ,तुम्हारे हाँथों में, अपने कत्ल की चाहत मे।

दिया है खंज़र ,तुम्हारे हाँथों में, अपने कत्ल की चाहत मे।
यकीन है मुझको की मुझी से तू प्यार करता है 


दिया है खंज़र ,तुम्हारे हाँथों में, अपने कत्ल की चाहत मे।
क़त्ल कर दो  और पूछो ये  की दर्द कैसा था ? 


दिया है खंज़र ,तुम्हारे हाँथों में, अपने कत्ल की चाहत मे।
वफ़ा की राह में ऐसे भी तो रोज मरते हैं। .... 








तुरपाई

कच्चे धागों से ही सही
फटते दिल की तुरपाई कर दो  

Wednesday, 22 October 2014

Diwali 2014

मिटटी के दिए में छोड़ आई थी बचपन
बिजली की चमक में दिल बैचैन सा क्यों है





Friday, 17 October 2014

तुम्हारी "याद "

तुम्हारी "याद " को भी बुरी आदत है
हर वक़्त,बेवजह,यूहीं आते रहनी की........ 

Tuesday, 14 October 2014

आओ ना


मीठे सपने बिखर  रहे हैं 
तुम सपना बन कर आओ न 

देखो मुझको  भूल मत जाना 
ऐसी भूल बन जाओ ना 

मेरी तुम्हारी, तुम्हारी  मेरी 
ऐसी  कहानी बन जाओ ना

बेइन्त्बाह  बेपनाह मोहब्बत 
बनकर आँखों मेँ  बस जाओ ना










Friday, 3 October 2014

प्यार करो।

दिल की बात जब चुपके से अंगड़ाई ले
पलक खुलते ही, सिर्फ  "वो" ही सुनाई दे
 ख्यालातों  की भीड़ में जाने से पहले
होठों की गर्म लकीरों मे उतर जाने दो

"उसको"  तुम  ऐसे, ही अभी प्यार करो।








Thursday, 25 September 2014

बच्पन

वो पहली बारिश की गिरती खुशबू
और "धूल" लहराती हुई मटमैली साड़ी पहने
मेरी  साँसों में उतरती थी

और मैं,हवाई चप्पल पहने,
सीने में  प्यार लिए
हवा सी उड़ती जमीं नापती थी

तबसे , अब तक, न जाने
कितनी बारिशें भीग गईं
पर  मिट्टी  की वो खुशबू
न समेट  पाई ,और न ही
मैं हवा बन उड़ पाई।




Wednesday, 20 August 2014

प्रतिबिम्ब

आज , उतारो मुझे अपने शब्दों में
मेरी हस्ती है की बढ़ती- घटती सी रहती है
कल  कुल ने मेरे,परिभाषित किया था मुझे
आज अश्कों का तुम्हारे प्रतिबिम्ब हूँ मैं 

Saturday, 2 August 2014

आधा-अधूरा दिल

जब कभी लॉन में तुम्हारे 
पूरा चाँद उतरे 
पूछना तो.
यूँ आधा अधूरा और फिर पूरा होते 
क्या दर्द  नहीं होता 
मेरा दिल जो  टुटा था परसों 
अभी तक आधा ही पड़ा है 
तुम मिलते तो शायद जोड़ पाते हम 
अब जो नहीं मिले तो  
आधे -अधूरे चाँद को ही 
दे डाला है अपना आधा-अधूरा  दिल 
और जब भी भी चाँद पूरा होकर 
तुम्हारे लॉन मैं उतरे 
पूछना  तो 
कहाँ छोड़ आया है 
मेरा आधा-अधूरा दिल 

Wednesday, 30 July 2014

पिछला पहर

रात के पिछले पहर ने हँस  कर कहा था
वो नहीं आएगा, पर मैं कल जरूर आऊँगा


हम

समय का क्या है , वो तो हर वक़्त बदलता रहता है
वो तो बस हम हैं, जिन्हें बदलने से डर लगता है 

Friday, 4 July 2014

रूहें

चारो तरफ हैं बिखरी  हुई रूहें
बेमतलब बहती हुई सी जिंदगी
सिर्फ लिबास तक आँखे जा कर लौट आतीं हैं
रूह से क्यों, कोई मिलता नहीं कभी ।।।।।।।।।।।।

Sunday, 8 June 2014

नहीं,,,,,,,,,,,,,

साया वो है
जो तुम गर  रौशनी में  चलो
तो चुपचाप तुम्हारे पीछे चले
साया वो है
जो तुम गर रौशनी  से  हटो
तो तुम्हारी राह लिए आगे चले

जब मैं कहानी बन जाऊं

जब मैं कहानी बन जाऊं

बस दूर मुझे मेरी आकृति सी दिखती है
धूप  में , खुले हुए सर्द केश
चुपचाप सी  बैठी हुई,
या बैठा दी गयी हुई
उठने , में, चलने में, सोने में
एक जमाना साथ चला चलता हो जैसे
हड़ियाँ  कराहतीं हो , हर बार हिलने पर
और जैसे  यूँ सूरज को देखती हुई
कई जन्म जी लेती, कई जन्म मर लेती है
मरने के इंतज़ार में जीती हुई जिंदगी
हर पल, हर लम्हा, कितने किस्से भरे हुए
जैसे रात गुजरती है धीरे से करवट लेकर
शायद मैं भी गुजर जाऊँ  युहीं चुपके से
तुम मिलना तो कहना लोगों से

वो यहीं बैठा करती थी
वो हर बात पर हँसती  थी
वो हर बात पर रोती  थी





Monday, 19 May 2014

हम तुम

यह मेरी मोहब्बत ही तो है

की तुमको खोने के डर से
कभी पास आने न दिया



Sunday, 18 May 2014

"तुम्हारी यादों" का भी कोई मौसम होता.

इस बार दूर दूनिया देशों का कैलेंडर 
टांगा है दीवार पर 
जैसे दिन के साथ महीने बदलते गए 
और महीने सालों में ढलते गए
 हर माह दूर दुनियाँ , देशों की
 रंगीन तस्वीर में उतर कर 
मैं हर पल नए महीने जीती रही 
सिर्फ एक ही  धुन  में की "तुम्हारी यादों" को
 मैं दुनिया के हर कोने तक ले जा सकूँ 
लेकिन मौसमों ने  शायद मुझसे बगावत की है
 बिना बुलाए, बिना सुने, चले आतें हैं 
 सर्दी, गर्मी, बरसात। 
और फिर सर्दी गर्मी बरसात
मेरे आस पास चकर काटते ,
थकते नहीं, रुकते नहीं  
और मैं सोचती रह जाती हूँ 

की काश "तुम्हारी यादों" का भी कोई मौसम होता
या कैलेंडर में एक महीना जो सिर्फ "तुम्हारा" होता 





Thursday, 15 May 2014

मैं और तुम

मैं और तुम

आह वो प्यार भरा बचपना , 
जबरन रूह को काबू  करती जवानी
तुमसे मिलना  और बिछड़ना
तुमसे पूरी और अधूरी मेरी कहानी



Thursday, 8 May 2014

तुम्हारी याद

जैसे ही रात फैलती है अपनी काली स्याही लिए
तुम्हारी "याद" एक सुनहरी धूप  लिए उतरती है
और हम ,एक सोंधी सी अंगड़ाई में  उलझ कर
उस बिखरे से  छण  को सौ बार जी लेते हैं 



Saturday, 26 April 2014

धूप




धीरे से गुनगुनाती धूप बिखर गयी 
अँधेरों को मनाती धूप मचल गयी 

Sunday, 20 April 2014

सुबह

धीरे से उठती हुई सुबह
कुछ ऐसा बिखेरती है
अपने सुनहरे गेसूं
की आकाश की नीली पलकें
मदहोश हो झपका जाती हैं
कुछ गर्म से आंसूं
और मैं हथेली उठा 
दुआ मांगती, समेट लाती हूँ
तेरे प्यार का जादू 

Tuesday, 8 April 2014

मोहब्बत

इमली से रगड़ कर पाक -साफ़ करते 
तुम भूल जाते हो की मोहब्बत  पीतल 
कि कढ़ाई नहीं कि चमक उठेगी 
यह तो ऐसी रुस्वाई है कि 
याद न रखो तो, और याद आती है 
और अगर कहीं भूले से  भूल जाओ तो
खुद में, खुद से. शिकवे और गिले गुनगुनाती है

Wednesday, 2 April 2014

बच्चा

अब भी एक मासूम सा बच्चा है मुझमें
जो दिल के टूटने पर हैरान हुआ रहता है 

Saturday, 29 March 2014

मैं और तू

सर उठा तो  दूं 
आसमान में चेहरा तेरा  दीखता है
सर झुका तो दूँ तो
मेरी परछाईं के साथ तू चलता है

आज का "दिन",

आज का "दिन",फिर युहीं उतरा था मेरे आँगन में
मैने भी कहा जाओ  "दिन"
जाओ घूमो  और देखो
लोग तुमको आज कितना मनाते  हैं
कहीं रंगो क हुड़दंग है तो कहीं भंग का गंध
होली है  आज होली है
की  आवाज से मेरा "दिन" रह जाता है दंग
थका हारा लौटता है शाम को मेरे पास
लोग पूछतें हैं मुझसे कि
आज कैसे मनाया "दिन "
कैसे समझाउ  की  मैं  दिन नहीं मनाती
मैं  "लोग" मनाती  हूँ
दिन आज का "दिन"
मुझको "कल" से अलग नहीं दीखता
इसीलिए
मैं  रोज होली मनाती हूँ
रोज  दीवाली सजाती  हूँ 

Friday, 28 March 2014

तनहाई

बहुत  अकेला सा था दिल  तुम्हारे बिना
तुमने भी तनहाई से अच्छी पहचान कराई--

तनहाई से मिली जो अधुरी जिंदगी  मेरी
जिंदगी ने जी भर कर तेरी कमी बतायी


Thursday, 27 March 2014

वादा

क्या कहूं ?क्यों इस मोड़ पर बैठी रही ताउम्र
जिंदगी बोल कर गयी थी "यहीं मिलूँगी "  

Wednesday, 19 March 2014

दिल

"दर्द" की  बात सुनता है तो बरस पड़ता है
 वैसे दिल को आदत है खामोश रहने की
 

Tuesday, 18 March 2014

आँसू

बिछड़ के गिरता तो गुम  हो जाता आँसू 
गम तो है कि आँख में है,पर गिरता नहीं कभी। 

Monday, 17 March 2014

होली

आज फिर धीरे से दिन उतरा था पहलू  में 

मैने फूलों के रंग से रंग डाला है दिन को 

Wednesday, 5 March 2014

जिंदगी ( IT goes on)

जिंदगी हर रोज  चाँद को नए किस्से सुनाती  है 
चाँद उबा सा बैचैन  सा चला जाता है बादलों के पार 

जिंदगी हर रात के बाद सूरज को उठाया करती  है
सूरज, झुंझलाया सा निकलता है अँधेरे से हार 

जिंदगी युहीं  तनहाई में ढूंढती है खुद के होने के राज 
जाने क्यूँ  खुद को खुद से खफा सी पाती है कई बार। 

Saturday, 22 February 2014

धूप

दीवार पर धूप जब बिखरती है
थोड़े से सहारे के लिए
खुद की  गर्माहट से
दीवार की शीत को ढकती है
और फिर
एक पल या दो पल को
धूप  की आँख लग जाए
और सांझ हो जाए
तो शायद वहीँ दीवार पर
सरसराती  पुरवाई ओढ़े
धूप  सो जाए एक दिन के लिए 

Monday, 17 February 2014

तुम और मैं

तुम ओस की  बूंद बन गिरते रहो
मैं गुलाब की पंखुडी ,बन तुम्हे बटोरती रहूँ



 

Sunday, 16 February 2014

Me and my thoughts.......: randomites just yun hi

बादलों में  छुपा आसमां है या
 अरमानो से बिखरा जहाँ है
 चाँद खेलता है लुका-छुपी मुझसे
 चाँदनी सारे राज कह जाती है मुझसे 

randomites. kuch yun hi

हाँ दिल को छूते थे  तुम ,पर अक्सर भूल जाते थे 
बिखरे दिल बड़ी मुश्किल से सम्भाले जाते   हैं

वो कल जो तुमने लिखी थी कुछ  प्यार भरी  बातें
किताबों से उतर कर पंक्तियाँ , तितलियाँ बन बैठी

सुनो, बड़ी मुददत से एक बात कहनी थी तुमसे
छोड़ो ,जाने दो कभी ,अगले जन्मों  में  कह  दूँगी तुमसे 

दोस्ती


हाँ धूप में, बहारों ने, फूलों से दिल्लगी की  थी
जैसे तुमने उनसे, इनसे और  हमसे दोस्ती की थी 

Sunday, 9 February 2014

उम्र का मकाम बदलता सा दिखता है मुझे


उम्र का मकाम बदलता सा दिखता  है मुझे 
कोई मतलबी सा, कोई अपना सा दिखता  है मुझे 
नाकाबिल-ए -ख्यालों का सिलसिला जारी सा रहे 
गुमशुदा सा, पर फिर भी जिन्दा सा दिखता  है मुझे 

Tuesday, 14 January 2014

randomites just yun hi

बादलों में  छुपा आसमां है
या अरमानो से बिखरा जहाँ है

चाँद खेलता है लुका-छुपी मुझसे
चाँदनी सारे राज कह जाती है मुझसे

यूँ तो जानती हूँ मैं भी कि अपना हश्र क्या होगा
फिर भी उम्मीद का एक दिया रोज जलाती -बुझाती  हूँ मैं









 

Sunday, 12 January 2014

दिल

कुछ तो टूट कर बिखरा है यहाँ वहाँ
मेरा दिल खो गया था , क्या तुम्हे पड़ा मिला ?
 

praveen shakir

अब भी बरसात कि रातों में बदन टूटता है
जाग उठती है अजब ख्वाइशें अंगड़ाई  की
 

Wednesday, 8 January 2014

दिल


दिल जब टूटता  है तो अरमान नहीं बाटे जाते
युहीं घुट के दफ़न होने  का रिवाज है जमाने में

 

रिश्तों के अर्थ

क्यूँ  पहचान करते  है इन रिश्तों से
गले में पड़ी  रहती है जंजीर की तरह

रिश्ते न टूटतें  है  न आवाज़ भरने देते  है
 धूमिल होते  कई रिवाज़ों की तरह

कभी हल्के से छु दो ढरा के बिखर जाएगी जिंदगी
न महसूस करो  तो उहीं  जिए जाती है बीमार कि तरह 
 

बारिशों के मौसम की खूशबू बदल गयी


मिटटी के भीगते ही जो लगती थी आग मुझे
मिटटी से दूर निकली तो बातें  बदल गयीं

हैरां  हूँ मैं और सोचती  हूँ  यही अकसर
कैसे तू मिला मुझे ?कैसे  मैं तुझसे मिली ?

तुझसे  बिछुड़ कर भी जिन्दा हूँ मैं मगर
तुझसे  मिली तो पल में जिंदगी महक गयी 

बारिशों के मौसम की  खूशबू बदल गयी
बहुत कुछ मैं भूली, और कुछ यादें बदल गयीं 










 

Monday, 6 January 2014

सावन

 जाने क्यूँ ऐसा होता है की सावन को मनाते मनाते
आसमा खफा होता रहता है, रंग बदलता रहता है 
सावन भी तो  किसी बिगड़े बच्चे कि तरह ,
कभी, कड़क के , कभी बरस के ज़िद  मनवाता रहता है 

Friday, 3 January 2014

बैचैन दिल


अब  टूट चूका हूँ मैं तन्हाइयों से
और हर वक़्त शोर मचाती  तेरी यादों से ,
दिल का दर्द भी अब मुक्त हो उठा है
और रात - रात भी अभी अभी उठकर
गयी है एक तारा तलाशने
चाँद बेवफा निकला न
उसे कहाँ फुरस्त है
खुद के आधे  अधूरे और फिर पूरे होने से
बादल तो बस मुसाफिर हैं
अब बस थमना ही होगा
रुकना ही होगा
भूलना ही होगा
जीना भी होगा
रुक जाऊं? दो पल
शायद  रात अपना सितारा ढूंढ ले  (वंदना