Tuesday, 14 January 2014

randomites just yun hi

बादलों में  छुपा आसमां है
या अरमानो से बिखरा जहाँ है

चाँद खेलता है लुका-छुपी मुझसे
चाँदनी सारे राज कह जाती है मुझसे

यूँ तो जानती हूँ मैं भी कि अपना हश्र क्या होगा
फिर भी उम्मीद का एक दिया रोज जलाती -बुझाती  हूँ मैं









 

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