Tuesday, 14 January 2014

randomites just yun hi

बादलों में  छुपा आसमां है
या अरमानो से बिखरा जहाँ है

चाँद खेलता है लुका-छुपी मुझसे
चाँदनी सारे राज कह जाती है मुझसे

यूँ तो जानती हूँ मैं भी कि अपना हश्र क्या होगा
फिर भी उम्मीद का एक दिया रोज जलाती -बुझाती  हूँ मैं









 

Sunday, 12 January 2014

दिल

कुछ तो टूट कर बिखरा है यहाँ वहाँ
मेरा दिल खो गया था , क्या तुम्हे पड़ा मिला ?
 

praveen shakir

अब भी बरसात कि रातों में बदन टूटता है
जाग उठती है अजब ख्वाइशें अंगड़ाई  की