Saturday, 2 August 2014

आधा-अधूरा दिल

जब कभी लॉन में तुम्हारे 
पूरा चाँद उतरे 
पूछना तो.
यूँ आधा अधूरा और फिर पूरा होते 
क्या दर्द  नहीं होता 
मेरा दिल जो  टुटा था परसों 
अभी तक आधा ही पड़ा है 
तुम मिलते तो शायद जोड़ पाते हम 
अब जो नहीं मिले तो  
आधे -अधूरे चाँद को ही 
दे डाला है अपना आधा-अधूरा  दिल 
और जब भी भी चाँद पूरा होकर 
तुम्हारे लॉन मैं उतरे 
पूछना  तो 
कहाँ छोड़ आया है 
मेरा आधा-अधूरा दिल 

Wednesday, 30 July 2014

पिछला पहर

रात के पिछले पहर ने हँस  कर कहा था
वो नहीं आएगा, पर मैं कल जरूर आऊँगा


हम

समय का क्या है , वो तो हर वक़्त बदलता रहता है
वो तो बस हम हैं, जिन्हें बदलने से डर लगता है