Wednesday, 14 October 2015

तुम्हारी याद


तुम्हारी याद जैसे आदतन रोज आती है
मेरी तन्हाई भी आदतन इंतज़ार करती है
कभी ऐसा भी हो की "मेरी तन्हाई "और "तुम्हारी याद"
अकेले मिलते और चाय पीते
अदरख वाली चाय ....... और मैं और तुम
दीवार से सटे , दूर खड़े , इंतज़ार करते
की तुम्हारी याद तुम्हारे साथ लौट जाए
और मेरी तन्हाई मुझे घर ले आए ,,,,

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