Tuesday, 30 June 2015

वो

हवा का झोंका था, उड़ गया वो
मीठा  सा दर्द दिया दिल को
गहरी सी आस लिपट उठती है बदन से
प्यार करता है जब भी कोई दिल से

Sunday, 28 June 2015

महक होती है क्या हंसी यादों की ?
सुलगते बदन से क्यों उठती है धुँआ बन कर ?