Wednesday, 21 October 2015

मेरे सवाल

मैं कौन हूँ ?
मैं क्यों हूँ ?
मैं कहाँ से आई  हूँ ?
मैं कहाँ जा पाउंगी ?
तुम कौन हो मेरे ?
तुम क्यों हो मेरे ?
मेरे कुछ सवाल ही
क्यों आते हैं मुझ तक ?
कुछ ऐसे ही सवालों की 
उलझन में उठी  है मेरी सुबह
और मैं स्वयं को समझने की चाह में
एक प्याली  चाय लिए,
कभी बीते कल को सोचती हूँ
और फिर कभी कल के बारे में सोचती हूँ
सिमित सी मेरी जिंदगी
ऐसे ही सवलों से और सिमित हो जाती है
और मैं इसी  बैचैनी में खुद को तलाशती हूँ