Monday, 18 July 2016

दिल पर पत्थर रख लो

दिल पर पत्थर रख लो
की रख लेने से मन के दुःख
नहीं उड़ पाएँगे
और उमड़ते आँसू  भी
कहीं हथेलियों में दब जाएगें
और तुम मुसकरा कर
जमाने को बहला देना
और सुनो यही चलन है नियति का
कि तपता  सूरज भी पहाड़ों में सो जाता है
और अँधेरी रात भी धीरे से उतर जाती है
और जब तुम फिर से महसूस कर  पाओ
तो दर्द को तकिए से निकाल
आसमान में उड़ा देना
और  मुसकराते  चेहरे से
चाँद को बता देना की
काले बादलों के बाद सितारों से
सजा आसमान है
और तुम्हे चाहने वालों से भरा जहाँ है 

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