Friday, 2 February 2018

शायद युहीं मेरी मौत भी हो


रगीन सी शाम को जब  बादल उमड़ता है
डूबते सूरज  की किरणों से कुछ ऐसा कहता है

हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे
डूबने से पहले,  आ आकाश पर  खेलेंगे

मैं भी यही उलझती सी संवरती सी कहती हूँ
कल को नहीं रहूंगी मैं, पर आज तो जी  लूँ








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